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  • 18
  • December

सफला एकादशी

सफला एकादशी

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि सफला यानि सफलता की प्रतीक। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान अनंत गुणा फलदायी तो होते ही हैं साथ ही व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाकर सफलता के नए सौपान दिलाने वाली भी होती है। सफला एकादशी व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। 22 दिसंबर वर्ष 2019 में यह व्रत मनाया जायेगा। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को व्रत के दिन प्रात: स्नान करके, भगवान की आरती करनी चाहिए और भगवान को भोग लगाना चाहिए। इस दिन भगवान नारायण की पूजा का विशेष महत्व होता है। ब्राह्मणों तथा गरीबों, को भोजन अथवा दान देना चाहिए। जागरण करते हुए कीर्तन पाठ आदि करना अत्यन्त फलदायी रहता है। इस व्रत को करने से समस्त कार्यो में सफलता मिलती है. यह एकादशी व्यक्ति को सभी कार्यों में सफलता प्रदान कराती है।

धर्म शास्त्रों में सफला एकादशी के विषय में कहा गया है, कि यह एकादशी व्यक्ति को सहस्त्र वर्ष तपस्या करने से जिस पुण्य की प्रप्ति होती है, वह पुण्य भक्ति पूर्वक रात्रि जागरण सहित सफला एकादशी का व्रत करने से मिलता है। एकादशी का व्रत करने से कई पीढिय़ों के पाप दूर होते है। एकादशी व्रत व्यक्ति के ह्रदय को शुद्ध करता है और जब यह व्रत श्रद्वा और भक्ति के साथ किया जाता है तो मोक्ष का भी प्रदाता माना गया है।

इस व्रत का संकल्प करके इस व्रत का आरंभ नियम दशमी तिथि से ही प्रारम्भ करे। व्रत के दिन व्रत के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही साथ जहां तक हो सके व्रत के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। भोजन में उसे नमक का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। दशमी तिथि कि रात्रि में एक बार ही भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन उपवासक को शीघ्र उठकर, स्नान आदि कार्यो से निवृत होने के बाद व्रत का संकल्प भगवान श्री विष्णु के सामने लेना चाहिए। संकल्प लेने के बाद धूप, दीप, फल आदि से भगवान श्री विष्णु और नारायण देव का पंचामृ्त से पूजन करना चाहिए। रात्रि में भी विष्णु नाम का पाठ करते हुए जागरण करना चाहिए। द्वादशी तिथि के दिन स्नान करने के बाद ब्राह्मणों को अन्न और धन की दक्षिणा देकर इस व्रत का समापन किया जाता है।

कई बार लिए गए छोटे-छोटे नियम जीवन में सफलता के पायदान दिलाता चला जाता है, ऐसे ही विशेष माह में विशेष तिथि-त्यौहार पर किया जाना वाला धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य व्यक्ति को न केवल आने वाली समस्याओं से मुक्ति दिलाता है बल्कि सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक बनकर जीवन में आनन्दाभूति का भी वरण करने वाला होता है।

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