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  • 03
  • November

सकल सुमंगल..

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुणगान।
जो सुनहिं वो तरही भव सिंधु बिना जलजान।
श्रीराम जन्म महोत्सव की श्रीराम नवमी की आप सभी को अनन्त कोटि शुभकामनाएं।
श्रीराम हमारे भीतर बैठी हुई एक चेतना है। श्रीराम सरलता के प्रतीक है। श्रीराम सौम्यता के प्रतीक है। श्रीराम के नाम का गुंजन अगर मन के भीतर प्रवाहित होने लग जाए तो सुख-शांति और उसके साथ में आती हुई सरलता जो कि जीवन में एक्सेपटिब्लिटि को लेकर आती है। तीनों ही निर्बाध गति के साथ में चलना शुरु होते हैं। हमने भौतिक सुख प्राप्त किए। हमने आध्यात्मिक सुख प्राप्त किए और वहीं से मन में एक सुख के साथ में सरलता की कामना प्रवाहित होने लगी कि कब जो भी स्थितियां हैं वो हमारी एक्सेपटिब्लिटि रहेगी और वहीं पर मन के भीतर हम बहुत गहराई से आध्यात्मिक चिंतन को भी लिए हुए हैं तो राम नाम के शब्द श्रीराम का गुंजन जब मन के भीतर प्रवाहित होने लगता है तो आप देखते हैं कि प्रत्येक काज अपने आप ही आसानी से परिपूरित होने लगते हैं।
हम यहां पर अपनी संकल्प सिद्धि को आगे लेकर चलना चाहते हैं। हम यहां शक्ति पर्व के अंतिम दिन और श्रीराम के जन्म के इस उत्सव के साथ में अगर अपने मन के भीतर चेतनाओं को और गहराई से प्रस्फुटित करना चाहते हैं तो अच्छे से बढऩे का कार्य कर सकते हैं। मैं कई बार चेतनाओं के चर्चा करता हूं। इसका आशय यह है कि हम जिस भी कार्य में संलग्न हो गए वहां पर एकाग्रता की एक लौ जलती हुई प्रतीत हुई। हम सिर्फ वहीं हैं। उस क्षण पूरे तरीके से वहीं विद्यमान हैं। संघर्ष है जीवन में किन्तु उनको हटाकर जो कार्य कर रहे हैं, हमारा पूरा जो आत्मिक स्तर है, अगर वहीं विद्यमान है तो सफलता की गुंजाइश बहुत अधिक बढ़ जाती है। जब व्यक्ति कांशियस एप्रोच के साथ में किसी से प्रभावित हुए बिना अपने कामकाज की ओर लगता है तो वहीं पर उसके लिए एक नया लेवल एचीवमेंट की ओर जाता हुआ दिखाई देता है। तो इस दिन अपने लिए हम यही कामना करें और राम नाम का सुमिरन करते हुए सियाभर रामचन्द्र के जो एक तरह से घर में विराजित दरबार होता है उसके दर्शन करते हुए अपने कार्य की शुरुआत करें तो और ज्यादा अच्छा है।

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