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श्राद्ध पक्ष : तर्पण और दान

विधि का विधान ही ऐसा है कि प्रत्येक मनुष्य के जीवन में संघर्ष और समस्याएं निहित होती हैं। संघर्ष और समस्याएं जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त तक सदैव बनी रहती है। हां, ये संभव हो सकता है कि किसी के कम हो और किसी के ज्यादा, लेकिन इनसे कोई बिरला ही बच पाता है। मनुष्य जीवन में श्राद्ध पक्ष ऐसा महत्वपूर्ण समय होता है, जिससे वह दैनिंदिन की समस्याओं से निजात पा सकता है। वह समस्या किसी भी क्षेत्र विशेष की हो, घर-परिवार की हो, रिश्ते-नाते में हो, व्यापार में हो, मित्रों में हो, नौकरी में हो, संतान पक्ष से हो, शादी शुदा जीवन की हो या फिर धन-दौलत की हो श्राद्ध पक्ष के पूरे 15 दिनों में पूर्ण मनोभाव से अपने पूर्वजों, पितरों, ऋषि-मुनियों और ज्ञात-अज्ञात किसी घर-परिवार के सदस्य, मित्र-परिचितों के सदस्यों को सद्गति के लिए यज्ञ की संज्ञा दी जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। ये 15 दिन का ऐसा यज्ञ है जिसमें आहुति देकर मनुष्य अपनी दिन-प्रतिदिन की समस्याओं से निजात पाकर एक सुखी जीवन की ओर अग्रसर हो सकता है।

श्राद्ध पक्ष के दौरान यह जरूरी नहीं है कि आपके किसी रिश्तेदार की तिथि विशेष पर ही श्राद्ध पक्ष को कर्मकांड आदि किए जाएं, बल्कि आप सभी दिन एक निश्चित समय पर किसी नदी, सरोवर पर जाकर तर्पण करें। तर्पण विधि स्वयं नहीं जानते हों तो किसी ब्राह्मण से करवाएं। नदी-सरोवर में संभव नहीं हो पा रहा है, ऐसी स्थिति में घर में या नजदीक किसी पीपल के वृक्ष के नीचे बरसात के पानी से श्रद्धा अनुसार श्राद्ध पक्ष में तर्पण करें तो निश्चित मानिये आपके भावी जीवन में आने वाली समस्याओं में कमी आप खुद महसूस करने लग जाएंगे। श्राद्ध पक्ष में अपने भावों की श्रद्धा को अपने पूर्वजों को अर्पित किया जाता है। अपने पूर्वजों का तर्पण करने के पश्चात श्रद्धापूर्वक ब्रह्माणों को भोजन कराकर यथा शक्ति दान करना चाहिए। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है जिससे वे आपको सुख व समृद्धि के सहित आशीर्वाद देते हैं।

हिन्दू धर्म के शास्त्रों में भी इसका वर्णन मिलता है जिसके अनुसार श्राद्ध पक्ष में तर्पण करना बहुत ही आवश्यक होता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पन्द्रह दिन नित्य तर्पण करना चाहिए। तर्पण के लिए प्रत्येक दिन मध्यान्ह 12 बजे से 1.30 बजे के मध्य तर्पण करना उत्तम माना गया है।

तर्पण करने के लिए पीतल की थाली में विशुद्ध जल (बरसाती पानी हो तो और बेहतर) भरकर, उसमें थोड़े काले तिल व दूध डालकर अपने समक्ष रख लें एंव उसके आगे दूसरा खाली पात्र रख लें। तर्पण करते समय दोनों हाथ के अंगूठे और तर्जनी के मध्य कुश लेकर अंजली बना लें अर्थात दोनों हाथों को परस्पर मिलाकर उस मृत प्राणी का नाम लेकर तृप्यन्ताम कहते हुये अंजली में भरा हुये जल को दूसरे खाली पात्र में छोड़ दें। एक-एक व्यक्ति के लिए कम से कम तीन-तीन अंजली तर्पण करना उत्तम रहता है। पूजा स्थान पर रखे हुये जल के थोड़े भाग को ऑखों में लगायें, थोड़ा जल घर में छिड़क दें और बचे हुये जल को पीपल के पेड़ में अर्पित कर दें। ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा निकल जायेगी और घर की लगभग हर प्रकार की समस्या से आप मुक्त हो जायेंगे।

आप भी अगर श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन 15 दिनों तक ऐसा कर पाए तो घर-परिवार में तो सुख-शांति व्याप्त होगी ही, आप अपने को भी खुद एक नई ऊर्जा से ओतप्रोत पाएंगे। ये 15 दिन आपका आने वाला भविष्य संवारने में मदद कर सकता है। जीवन को चलाने वाली अज्ञात शक्ति से ये कर्म आपको जोड़ते हुए प्रतीत हो सकते हैं। चाहिए तो सिर्फ श्रद्धा और पूर्ण मनोयोग से करने की इच्छाशक्ति। ये तो आप जानते ही हैं कि इच्छाशक्ति से बड़े से बड़े कार्य किए ही जा सकते हैं।

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