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  • 11
  • January

” मकर संक्रान्ति पुण्यकर्म, दान एवं मंत्र जाप “

” मकर संक्रान्ति पुण्यकर्म, दान एवं मंत्र जाप ”
हमारे देश में हर साल मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में बहुत ही उमंग व उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा करने का विशेष विधान है। मकर संक्रांति को सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से दस हजार गो दान का फल प्राप्त होता है। इस समय किया हुआ तर्पण दान और देव पूजन अक्षय होता है। ब्राह्मणों को भोजन के योग्य अन्न देने से अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति संभव हो पाती है। शीत काल होने से ऊनी वस्त्र, तुला दान और शय्यादान, कंबल, तिल, गेहूं, अक्षत-चावल, दाल-हरी सब्जियों का दान सभी पापों को नष्ट करने वाला बताया गया है तथा इस दिन सद्पुरुषों का पूजन भी परलोक में अनन्त फल देने वाला होता है।

ऊँ नम: सहस्त्रबाहवे आदित्याय नमो नम:
नमस्ते पदम्हस्ताय वरुणाय नमो नम:
नमस्तिमिरनाशाय श्री सूर्याय नमो नम:
नम: सहस्त्रजिहाय भानवे च नमो नम:
त्वं च ब्रह्मा त्वं च विष्णु रुद्रस्त्वं च नमो नम:
त्वमग्निस्सर्वभूतेषु वायुस्त्वं च नमो नम:
सर्वग: सर्वभूतेषू न हि किचित्वया विना।
चराचरे जगत्यस्मिन् सर्वदेहे व्यवस्थित:

इस महामंत्र का जाप सम्पूर्ण अभिलाषित पदार्थों तथा स्वर्ग आदि के भोग को प्राप्त करवाने वाला है।
ऊँ ह्लां ह्लीं स: सूर्याय नम: यह मंत्र भी सभी प्रकार की सिद्धि देने वाला तथा रोग नाश एवं किसी भी तरह के अनिष्ट का भय नहीं रहता।
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से देवताओं का दिन आरंभ होता है जो कि आषाढ़ मास तक रहता है। इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। भगवान सूर्य अपनी गति से प्रत्येक वर्ष मेष से मीन 12 राशियों में 360 अंश की परिक्रमा करते है।

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