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  • 08
  • December

ऐश्वर्य, श्री, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति करें पौष माह में

ऐश्वर्य, श्री, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति करें पौष माह में

सूर्य देवता के भग नाम से इस माह में उनकी पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य को ही भग कहा गया है और जो इनसे युक्त उन्हें भगवान माना गया है। भारतीय महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। जिस मास की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में रहता है उस मास का नाम उसी नक्षत्र के आधार पर रखा गया है। पौष मास की पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिये इस मास को पौष का मास कहा जाता है। वहीं मान्यता यह भी है कि इस मास में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिये क्योंकि उनका शुभ फल नहीं मिलता। पौष मास में सूर्य अधिकतर समय धनु राशि में रहते हैं। धनु राशि के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं। मान्यता है कि देव गुरु बृहस्पति इस समय देवताओं सहित सभी मनुष्यों को धर्म-सत्कर्म का ज्ञान देते हैं।

पौष मास में सूर्योपासना का महत्व:-  पौराणिक ग्रंथों की मान्यता अनुसार पौष मास में सूर्य देव की उपासना उनके भग नाम से करनी चाहिये। पौष मास के भग नाम सूर्य को ईश्वर का ही स्वरूप माना गया है। पौष मास में वैसे तो प्रतिदिन ही सूर्य को अघ्र्य देना चाहिए, किन्तु प्रतिदिन नहीं दे पाए तो पौष मास के प्रत्येक रविवार तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन, लाल रंग के पुष्प डालकर भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अध्र्य देने की भी मान्यता है। पौष मास के प्रत्येक रविवार को व्रत व उपवास रखने और तिल चावल की खिचड़ी का भोग लगाने से मनुष्य तेजस्वी बनता है।

पौष मास की सफला एकादशी:-  पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। बाकी एकादशियों की तरह इस दिन भी विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। यह उपवास मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला, सफलता दिलाने वाला माना जाता है इसलिये इसे सफला एकादशी कहा जाता है। सफला एकादशी 22 दिसंबर, 19 को मनाई जाएगी।
पौष अमावस्या- पौष अमावस्या का भी बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इस दिन को पितृदोष, कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिये भी इस दिन उपवास रखने के साथ-साथ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस बार 26 दिसंबर 2019 को पौष अमावस्य है।

पौष पुत्रदा एकादशी:-  पौष मास की शुक्ल एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखकर विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से व्रती को संतान का सुख मिलता है। पौष पुत्रदा एकादशी 06 जनवरी 2020 के दिन है।

पौष पूर्णिमा:- पौष पूर्णिमा इस मास का बहुत ही पावन दिन माना जाता है। धार्मिक कार्यों, भजन-कीर्तन आदि के साथ स्नान-दान आदि के लिये भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। पौष पूर्णिमा का उपवास रखने की भी धार्मिक ग्रंथों में मान्यता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार पौष पूर्णिमा का उपवास नववर्ष 2020 में 10 जनवरी को है।

पौष मास में संयमपूर्वक दिनचर्या का निर्वहन करने तथा नित-नेम से संध्या-उपासना करके व्यक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा जुटाने व आत्मोन्नति का सुअवसर प्राप्त कर सकता है। सूर्य के तेज और देवगुरु बृहस्पति की दिव्यता से संपन्न पौष मास आध्यात्मिक रूप से समृद्धि देने वाला है।

ऊँ घृणि सूर्याय नम:

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