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  • 25
  • September

अमावस्या को करें पितृ दोष निवारण पूजा

अमावस्या को करें पितृ दोष निवारण पूजा
वैसे तो अमावस्या का महत्व सर्वविदित है ही, लेकिन श्राद्ध पक्ष की अमावस्या का महत्व तब और भी अधिक हो जाता है जिसका संबंध पूर्वजों से रहता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उसके पूर्वजों का अहम रोल होता है, जिनके कारण वह दुनिया के अस्तित्व में बना हुआ है। ऐसे में व्यक्ति को अपने पूर्वजों यानि पितरों को, जो संसार छोड़ चुके हैं, उन्हें तर्पण, पूजा-व्रत आदि के माध्यम से उन्हें तृप्त करना चाहिए जिससे जीवन में आने वाली कठिनाई-परेशानियों से बचा जा सके। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो ऐसे व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में असफलता ही मिलती है। प्रतिमाह आने वाली अमावस्या को पितरों का तर्पण कर उन्हें तृप्त कर सके तो असफलताएं सफलता में बदल सकती है। वैसे तो इससे मुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय पितरों का श्राद्ध करना है और इसी के साथ अगर आप अपने घर में पितृ दोष निवारण पूजा कराते है तो पितृ दोष से श्रापित जीवन से जल्दी ही मुक्ति मिलती है। जिससे जीवन में आने वाली बाधाएं स्वत: ही दूर होने लगती है।

पितृ दोष निवारण पूजा
– कुंडली में पितृ दोष है तो उसे पितृ दोष निवारण पूजा करने से अवश्य ही लाभ होगा।
– पूजा करने से जातक के मन में अध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ती है और उसे आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।
– इस पितृ दोष निवारण पूजा के प्रभाव से जीवन की सारी बाधाएं और मुश्किलें दूर होती हैं।
– संतानहीन जातकों को पितृ दोष निवारण पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है।
– गृहस्थ जीवन और कामकाज में आ रही सभी समस्याओं से निजात मिलती है और घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
– पितृ दोष की शांति के लिए अपने पितरों को याद करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।

शास्त्रों के अनुसार पितृ दोष निवारण पूजा महीने में आने वाली अमावस्या को करना या करवाना श्रेष्ठतम कहा गया है। इसके अलावा पितृ पक्ष के दौरान भी यह पूजा की जाए तो अनन्त गुणा फलदायी सिद्ध होती है। ऐसे में अगर इस दिन किसी का श्राद्ध नहीं भी हो तो भी इस दिन तर्पण और श्रद्धानुसार ब्राह्मण को भोजन और दान करने से आने वाली समस्याएं स्वत: ही दूर होती चली जाती है। पितृ दोष के कारण अदृश्य-से होते हैं, जो प्रकट रूप में तो सामने नहीं आते, लेकिन बनते काम रुकावटों की ओर चले जाते हैं, ऐसे में इस दिन किए गए तर्पण-श्राद्ध से घर-परिवार से लेकर कामकाज के क्षेत्र तक में समस्याओं के निवारण दूर होते देखे जा सकते हैं। पूजा के प्रभाव से कार्य की रुकावट दूर होती है। शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। पितृ दोष से मुक्ति मिलती है तथा आत्मविश्वास बढ़ जाता है। विज्ञान भी यही मानता है कि श्रद्धा भाव से किए गए कार्य निश्चित सफलता के द्योतक होते हैं। इसीलिए कहा भी गया है-श्रद्धया इति श्राद्धम्।

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